भारत रत्न के बारे में
भारत रत्न की स्थापना 2 जनवरी 1954 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी ।यह भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला ,साहित्य, विज्ञान ,सार्वजनिक सेवा और खेल के क्षेत्र में असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है । वर्ष 1955 से पहले इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है। भारत रत्न से सम्मानित व्यक्तियों को तांबे से निर्मित पीपल के पत्ते के आकार का पदक प्रदान किया जाता है जिस पर चांदी से भारत रत्न लिखा होता है। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी पहले व्यक्ति थे जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया उन्हें वर्ष 1954 में यह सम्मान दिया गया था।
भारत रत्न 2019
- प्रणब मुखर्जी
- भूपेन हजारिका
- नानाजी देशमुख
भारत रत्न 2019 राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में 25 जनवरी 2019 को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी , प्रसिद्ध संगीतकार भूपेन हजारिका और समाजसेवी नानाजी देशमुख को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का बयान जारी किया ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के विचारक नानाजी देशमुख और असमिया संगीतकार भूपेन हजारीका को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा । सरकार ने 4 वर्ष बाद भारत रत्न सम्मान की घोषणा की है इससे पहले वर्ष 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और पंडित मदन मोहन मालवीय ( मरणोपरांत) को भारत रत्न दिया गया था ।
20 वर्ष बाद यह पहला अवसर है जब 2 से अधिक लोगों को भारत रत्न के लिए चुना गया इससे पहले वर्ष 1999 में जय प्रकाश नारायण, पंडित रविशंकर, डॉ अमर्त्य सेन और गोपीनाथ बोर्दोलोई को भारत रत्न दिया गया था। वर्ष 1999 से पहले वर्ष 1998 और 1997 में भी तीन तीन हस्तियों को भारत रत्न दिया गया था प्रणब मुखर्जी भारत के तीसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया है ।
इन से पहले वीवी गिरी (1975) और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद (1962 )यह उपलब्धि प्राप्त कर चुके हैं । इनके अलावा भारत रत्न से सम्मानित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम 1997 जाकिर हुसैन 1962 और सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1954 भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं । परंतु इन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही “भारत रत्न “ सम्मान मिल गया था ।
नानाजी देशमुख पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के बाद भारत रत्न से सम्मानित होने वाले आरएसएस से जुड़े दूसरे नेता है इस वर्ष की घोषणा के बाद भारत रत्न से सम्मानित विभूतियों की संख्या 48 हो गई है ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के विचारक नानाजी देशमुख और असमिया संगीतकार भूपेन हजारीका को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाएगा । सरकार ने 4 वर्ष बाद भारत रत्न सम्मान की घोषणा की है इससे पहले वर्ष 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और पंडित मदन मोहन मालवीय ( मरणोपरांत) को भारत रत्न दिया गया था ।
20 वर्ष बाद यह पहला अवसर है जब 2 से अधिक लोगों को भारत रत्न के लिए चुना गया इससे पहले वर्ष 1999 में जय प्रकाश नारायण, पंडित रविशंकर, डॉ अमर्त्य सेन और गोपीनाथ बोर्दोलोई को भारत रत्न दिया गया था। वर्ष 1999 से पहले वर्ष 1998 और 1997 में भी तीन तीन हस्तियों को भारत रत्न दिया गया था प्रणब मुखर्जी भारत के तीसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया है ।
इन से पहले वीवी गिरी (1975) और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद (1962 )यह उपलब्धि प्राप्त कर चुके हैं । इनके अलावा भारत रत्न से सम्मानित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम 1997 जाकिर हुसैन 1962 और सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1954 भारत के राष्ट्रपति रह चुके हैं । परंतु इन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही “भारत रत्न “ सम्मान मिल गया था ।
नानाजी देशमुख पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के बाद भारत रत्न से सम्मानित होने वाले आरएसएस से जुड़े दूसरे नेता है इस वर्ष की घोषणा के बाद भारत रत्न से सम्मानित विभूतियों की संख्या 48 हो गई है ।
प्रणब मुखर्जी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को बंगाल प्रेसिडेंसी( ब्रिटिश भारत )के बीरभूम जिले के मिराती गांव में हुआ ।5 दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे प्रणब मुखर्जी वर्ष 2012-17 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति रहे । राष्ट्रपति के अलावा प्रणब मुखर्जी केंद्रीय वित्त मंत्री 2009 से 2012 व 1982 से 1984 विदेश मंत्री 2006 से 2009 व 1995 से 1996 और रक्षा मंत्री और 2004 से 2006 भी रह चुके हैं इनके अलावा प्रणब मुखर्जी को वर्ष 1991 में तत्कालीन योजना आयोग का प्रमुख बनाया गया था । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ड्रामेटिक,डिकेड, टर्बूलेंट ईयर्स और द कोलिजन इयर्स नामक पुस्तक भी लिख चुके हैं ।
इन की आत्मकथा श्रंखला की द कोलिजन ईयर्स नामक पुस्तक में राजनीतिक नजरिया प्रदान करने के साथ-साथ कुछ दुर्लभ रहस्यों को भी बताया गया है प्रणब मुखर्जी को वर्ष 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
इन की आत्मकथा श्रंखला की द कोलिजन ईयर्स नामक पुस्तक में राजनीतिक नजरिया प्रदान करने के साथ-साथ कुछ दुर्लभ रहस्यों को भी बताया गया है प्रणब मुखर्जी को वर्ष 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
नानाजी देशमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के मजबूत स्तंभ और प्रख्यात समाज सेवक चंडिका दास अमृतराव देशमुख (11 अक्टूबर 1916 से 27 फरवरी 2010 )को शिक्षा स्वास्थ्य और ग्रामीण लोगों के बीच स्वावलंबन हेतु किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है । महाराष्ट्र के परभनी जिले में कंजौली नामक गांव में जन्मे नानाजी देशमुख के पिता का नाम अमृतराव देशमुख तथा माता का नाम राजा बाई अमृतराव देशमुख था नानाजी देशमुख 12 वर्ष की आयु में संघ से जुड़े फिर जनसंघ से राजनीति में आए वे आपातकाल के विरोध जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के भी प्रमुख शिल्पकार रहे ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा नानाजी देशमुख ने वर्ष 1950 में गोरखपुर में भारत के पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना भी की थी नानाजी देशमुख ने दीनदयाल शोध संस्थान ग्रामोदय विश्वविद्यालय और बाल जगत जैसे सामाजिक संगठनों की स्थापना भी की थी विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले नानाजी देशमुख को वर्ष 1999 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
भूपेन हजारीका
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी भूपेन हजारीका (8 सितंबर 1926 से 5 नवंबर 2011 )एक गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि फिल्म निर्माता लेखक और असम की संस्कृति के अच्छे जानकार भी थे। वह ऐसे विलक्षण कलाकार थे, जो अपने गीतों को खुद लिखते थे संगीतबद्ध करते थे और गाते थे ।उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम सांस्कृतिक दूतो में से एक माना जाता है । भूपेन हजारिका ने अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा हिंदी बंगाली सहित कई भारतीय भाषाओं में गायन कार्य किया उन्होंने भारत की संगीत परंपरा को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया भूपेन हजारीका को पद्मश्री (1977) पद्म भूषण( 2001 )पद्म विभूषण( 2012 में मरणोपरांत) संगीत नाटक अकादमी (1987)दादा साहेब फाल्के पुरस्कार(1992) और असम रत्न(2009) सम्मान भी प्राप्त थे।इनके अलावा उन्हें वर्ष 1961 में शकुंतला के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था लोहित नदी पर बने ढोला सदिया पुल का नामकरण हाल ही में भूपेन हजारिका के नाम पर किया गया है।

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